मंगलवार, 9 फ़रवरी 2010

प्रेम

प्रेम तैर रहा है,
फागुन में,फागुनी बयार
के साथ,पर पता नहीं,
यह क्या है ?
प्रेम किसे कहते है ,
क्या होता है?
शायद यह दिल की
आरजू है, या दिमाग
का फितूर ,जो भी
है शायद एक अहसास है,
जिसे केवल अनुभव किया जा
सके ,अभिव्यक्त नहीं ,
शायद यह गलत है,
क्यूकि वैलेंटाइन डे जो
       आ रहा है,प्रेम प्रदर्शन
              का अनूठा .........
 ......अनोखा पर्व ,
      शायद ये प्रेम को
                     अभियक्त कर सके ...........

6 टिप्‍पणियां:

हास्यफुहार ने कहा…

बहुत अच्छी कविता।

मनोज कुमार ने कहा…

इस अभिव्यक्ति के लिये किसी ’डे’ का इंतज़ार क्यों?

Dinbandhu Vats ने कहा…

Aap ki rachana prasangik hai. vaise prem ko paribhasha ki jarurat nahi hai.ese sirf mahsus kar sakate hai.

Unknown ने कहा…

वाह!! बहुत खूब ....बहुत अची रचना

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत खूब, लाजबाब !

प० राजेश कुमार शर्मा ने कहा…

रचना उत्तम है। मित्रो यदि जन्म लग्न में प्रेम के योग नही है तो कैसे मिलेगा।