शुक्रवार, 26 मार्च 2010

आम आदमी

सरकार की योजनाओ का
विषय है आम आदमी
अर्थशास्त्रियो के अध्ययन का
विषय है आम आदमी
बजट में चर्चा का विषय
है आम आदमी
धरनों,रैलियों और प्रदर्शनों में
जूझता है आम आदमी
नेताओ के भाषण का सार
है आम आदमी
मीडिया में विवाद का केंद्र बिंदु
है आम आदमी
महानगरो,शहरो,कस्बो में
है आम आदमी
चारो तरफ है आम आदमी
लेकिन आम आदमी है कौन ?
कैसा है वो ?
कोई चेहरा,कोई शक्ल,कोई आवाज
 पता नहीं ?
शायद वह जो खास से अलग है
खोज रही हूँ मै उसे .........
अंधाधुंध आधुनिकता और वैश्वीकरण
  के दौर में ......
जो शायद किसी मोड़ पर मिल जाए
वह आम आदमी .........

5 टिप्‍पणियां:

vikas ने कहा…

गज़ब ,,बहुत अच्छी अभिव्यक्ति ,,,,इसी आम आदमी के बहाने तो सब अपना अपना प्लेटफोर्म तैयार कर रहे हैं,,,,इसी बहती गंगा में हाथ धो रहे हैं सच पूछिए तो ये आम आदमी के बहाने से राजनीति में बहुत आम खाए हैं ,

विकास पाण्डेय
www.vicharokadarpan.blogspot.com

देवेश प्रताप ने कहा…

बहुत बढ़िया .......आम आदमी एक मोहरा है जिसका प्रयोग करके .......सारे काम किये जाते है .

kunwarji's ने कहा…

बहुत बढ़िया....

अब आम तो आम ही है जी,
उसका रखवाला तो राम ही है जी,

कुंवर जी,



कुंवर जी,

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत बढ़िया .......आम आदमी एक मोहरा है

renu ने कहा…

bahut achcha likha hai. Plz apni is pratibha ko blog tak he simit mat rakhna.