बुधवार, 12 मई 2010

हमारी बात - एक कविता


साधो सुनो बात हमारी ,
बात उस तंत्र की जो है लोकतंत्र ,
लोगो का तंत्र जंहा लोग हँ ऊँची पहुँच के ,
बड़े रसूख वाले जिन्हें परवाह नहीं पिछडो की ,
शोषितों की परवाह नहीं ,
जो नित नए कारनामे करते है ,
और अपने ऊँची पहुँच से छिपाते है ,
मंदिरों जा अपना पाप धोते है ,
और साफ सुथरे दिखाई देते है ,
तो साधो उनकी की भी बात रखते है ,
कहते है उनके बात ,
साधो सुनो हमारी बात

9 टिप्‍पणियां:

Amitraghat ने कहा…

बढ़िया लिखा है विचारों से युक्त..."

देवेश प्रताप ने कहा…

बहुत खूब लिखा आपने .....यही सच्चाई है

vikas ने कहा…

सफेद कपड़ो में काले मनुष्य,पाप करके गंगा नहाये ,लेकिन कोई फायदा नहीं ...सुन्दर अभिव्यक्ति

विकास पाण्डेय
www.vicharokadarpan.blogspot.com

दिलीप ने कहा…

bahut khoob

हास्यफुहार ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति !

ARUN KUMAR ने कहा…

s

बेनामी ने कहा…

Its very nice for who doing corruption and showing as high profile person.Its good comment for the politicians.

upendra ने कहा…

pragya ji

bhaoot sahi kaha aapne ....

very nice

upendra ने कहा…
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