रविवार, 30 मई 2010

सपने

मेरे  सपने 
काली  अँधेरी रातो में,
सबके सोने पर 
जागते सपने 
सपने ,पानी ही पानी है .........
पहाड़ और ऊंचाईयां है 
सीढिया है ....
मै उनमे घूम रही हूँ ,खो गई हूँ .........
सबसे दूर ,सब रिश्तो से दूर 
जैसे अपने अस्तित्व के लिए  लड़ रही हूँ .......
सपने ,डराते सपने ,रुलाते सपने 
रोमांचित करते ,अहसास दिलाते ,
गुदगुदाते सपने 
उस अहसास के सपने जो  
बरसों नहीं भूलते ,
हसीन सपने ,सपनों में 
कानो में गूंजती है ,
 आवाजे ,वे आवाजे न जाने 
कीसकी है ,इश्वर या अंतरात्मा 
न जाने क्या ?
जो भविश्य को अपने में समाये 
कहते है ,जिनसे मै डरती हूँ ..........
कि   अगर वह सच हुए तो ........
मै बिखर जाउंगी  ,टूट जाउंगी 
लेकिन होगा तो वही जो लिखा है,
क्या  कहूँ बस ऐसे ही है मेरे सपने .............

13 टिप्‍पणियां:

ana ने कहा…

bahut sundar rachana

दिलीप ने कहा…

waah bahut khoob...ye mere sapne yahi to hain apne...mujhse juda na honge inke ye saaye

प० राजेश कुमार शर्मा ने कहा…

एकाग्रचित्त होकर मन की आंखों से सब कुछ देखने की बात है

Jandunia ने कहा…

काबिल-ए-तारीफ

sangeeta swarup ने कहा…

खूबसूरती से उकेरी हैं अपनी भावनाएं...

Udan Tashtari ने कहा…

वाह! बढ़िया!

sanu shukla ने कहा…

sundar abhivyakti hai....

Shekhar Kumawat ने कहा…

waah bahut khoob...

shandar

राजेन्द्र मीणा ने कहा…

सुन्दर रचना! आपके स्वप्न अवश्य सच होंगे ...उन्हें भूले नहीं स्मरण रखे ...शुभकामनाये !

श्रद्धा जैन ने कहा…

sapne waqayi main bhanvar ki tarah hai

दिव्यांशु ने कहा…

पाश ने लिखा है,"सबसे खतरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना।"इसलिए सपने देखते रहिए क्योंकि सपने ही तो अपने होते हैं।इन्हें हमसे कोई जुदा नहीं कर सकता है।

Aditya Tikku ने कहा…

bhav aur shabdo ka sunder mishran

Sonal ने कहा…

bahut sundar kavita...
Meri Nai Kavita padne ke liye jaroor aaye..
aapke comments ke intzaar mein...

A Silent Silence : Khaamosh si ik Pyaas