सोमवार, 31 मई 2010

रास्ते

रास्ते ,ये रास्ते 
ये अंतहीन रास्ते ......
जिन पर निकल पड़ी मै 
बिना किसी के साथ के ,
वो साथ ही क्या साथ है .........
जो राह में ही छोड़ दे ,
उस साथ को  मै छोड़ दूँ 
जो साथ मेरा छोड़ दे ........

20 टिप्‍पणियां:

श्यामल सुमन ने कहा…

एक एक शब्द आत्म विश्वास से भरपूर प्रज्ञा जी। वाह।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

देव कुमार झा ने कहा…

बेहतरीन प्रस्तुति... भावनाओं को शब्द रुप बहुत अच्छे से दिया है आपनें... बधाई.

राकेश कौशिक ने कहा…

वक्त के लिहाज से सच भी है और सही भी जैसे को तैसा तो मिलना चाहिए - अहसासों की सार्थक प्रस्तुति

दिलीप ने कहा…

sundar

sanjukranti ने कहा…

gazab..
gusse me chli kalam...lagta hai

PKSingh ने कहा…

bahut badhiya...

Jandunia ने कहा…

बहुत सुंदर

nilesh mathur ने कहा…

बहुत सुन्दर!

हास्यफुहार ने कहा…

बहुत सही रस्ता चुना है।
पर हमारे रास्ते में वर्ड वेरिफ़िकेशन का रोड़ा क्यों?

हास्यफुहार ने कहा…

बहुत सही रस्ता चुना है।
पर हमारे रास्ते में वर्ड वेरिफ़िकेशन का रोड़ा क्यों?

आचार्य जी ने कहा…

मनप्रसन्न।

राजेन्द्र मीणा ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
राजेन्द्र मीणा ने कहा…

...कम शब्दों में सुन्दर रचना !!! -------- और कोई आपके साथ हो ना हो .....................................ये सभी ब्लॉग साथी आपके हर पल साथ है !

vikas ने कहा…

स्वालम्बी होना बहुत ज़रुरी है,,
आपकी इन पंक्तियाँ ने सब कुछ कह दिया.
आत्मविश्वास से भरपूर ...

विकास पाण्डेय

www.vicharokadarpan.blogspot.com

Aditya Tikku ने कहा…

atulniy

बेनामी ने कहा…

There is no any post between 2 month.Where are you?

प्रज्ञा पाण्डेय ने कहा…

who r u ? kya mai apko janti hun .......
agr ha to plz bataye

आशीष/ ASHISH ने कहा…

गागर में सागर!
और क्यूँ ना कुछ नया लिखें?

Vikas ने कहा…

I really like your poem and i am also interested in editorial and blog on some serious issues.thanks for such a nice poem great

अरविन्द शुक्ल ने कहा…

रास्ते ही मंजिलों के काफिये होते सदा
सार्थक प्रस्तुति