रविवार, 24 जनवरी 2010

आल इज वेल


पिछले दिनों हाल ही में आई फिल्म थ्री इडियट देखी. फिल्म को देखकर अच्छा लगा पर एक बात जो शायद अगले कुछ दिनों तक नहीं भूलेगी वह है आल इज वेल. जी हा फिल्म में आई किसी मुसीबत में किरदारों का आल इज वेल कहना देखकर लगा की कितनी भी मुसीबते हो लेकिन हिम्मत रखे तो परेशानी कम हो सकती है ............
                 पिछले कुछ दिनों से युवाओं में ख़ुदकुशी करने की जो प्रवृति बढ़ी है उस पर गौर करने की आवश्कता है . आज आगे बढ़ने की होड़ ने शायद भावनाए खत्म कर दी है . माँ एवं पिता को अपना कैरिअर बनाना है और बच्चे को किसी से पीछे नहीं देख सकते इसलिए उस पर निरंतर दबाव बनाते है जिसका नतीजा यह होता है बच्चा तनावग्रस्त हो उस काम को अंजाम देता है जो उसे नहीं देना चाहिए ....... काश की वह भी समझ पाता और अपने दिल को समझा पाता की आल इस वेल ..................
                     .......जीवन में उसे आगे तो जरुर बढना है लेकिन अपनी आहुति देकर नहीं बल्कि हँसते खेलते हुए .काम वही करे जो उसे पसंद हो न की माँ और पिता की प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए . इस  तरह से किए गए प्रयत्न उसके उज्ज्वल  भविष्य   के निर्माण में सहायक होंगे ................

3 टिप्‍पणियां:

VICHARO KA DARPAN ने कहा…

sahi kha aapne ...lakin aaj ke is daur maien kabhi kabhi aisa lagta hai ke bacche bhi shaan ke mohre hogaye hai

Anutosh ने कहा…

मैंने भी अभी अभी देखी 3 idiots ,मैंने अभी खुद कॉलेज में हूं, ( engineering कॉलेज में नहीं सही law school में हूं (और बहुत हद तक मेरा law स्कूल ज्यदा strict है ) मुझे लगता है अभी भी भारत में उच्च शिक्षा में रचन्त्मकता ही कमी है,हम अभी भी पाठ्यक्रम तक ही अपनी ही सीमित हैं,आज भी हमारे देश की university aur colleges में उस्सी कार्य को सराहा जाता है जो की पाठ्यक्रम के अनुसार हो, मैं आशा करता हूं की भारत के शिक्षाविद इस बात को जल्दी समझेंगे और सभी छात्रों को एक ही पमाने पे नापने की बजाये सभी को उनकी अपने खाशियत और काबिलयत के अनुसार नापेंगे ,आपके ब्लॉग में अपना दर्द दिखाई दिया ,ईमानदार और समझदार ब्लॉग लेखन ,

meri najar mei ने कहा…

our education system is yet to be made student friendly.guardians are one aspect of it.o.k but once again a good try.