शुक्रवार, 29 जनवरी 2010

बचपन का दुःख

बचपन नाम है परेशानीयों से दूर रहने का .......जी हा जब हम जमीनी हकीकत से अनजान अपनी छोटे से संसार में खोये रहते है ...............वे ..जीवन के सुनहरे पल होते है ...........शायद सभी इससे सहमत है ..........
                               परंतु इसी संसार में कुछ बालको का जीवन ऐसा नहीं होता है .....उनका जीवन तो होटलों,ढाबो एवं घरो में झूठे बर्तन धोते और खाने के बाद टेबुल साफ करते हुए गुजरता है .अक्सर कही चाय की दुकान पर चाय ऐसा ही कोई छोटू देता है ,वह छोटू मालिको के हाथो पीटता है ,सर झुकाए सारे काम करते है ........और उफ़ तक नहीं करता है ...............
                                                        ये बाल मजदूरी है जो हमारे देश के कानून में अपराध है और इसके सजा का प्रावधान भी है .............आज बाल मजदूरी का मुद्दा मानव अधीकारो से जुड़ा है .कोई खास उम्र के बच्चे का किसी काम में लगे रहना बाल मजदूरी है .............
                                     यह बाल मजदूरी अपनी और अपने परिवार की मूलभूत आवश्कताओ को पूरा करने हेतु करता है इनकी संख्या देश में काफी है जो आपको अर्थव्यवस्था के सभी सेक्टर में दीख सकते है ............ये आपको बीडी ,हीरा ,पटाखा ,कालीन उद्द्योग एवं सडको पर जूता पालिश करते मीलेगे ....................
                                             भारत में इतनी तादात में बाल मजदूरो का कारण गरीबी ,अनपढ़ता ,बेरोजगारी ,जनसंख्या  की भरमार एवं गाँव से शहरो की ओर पलायन है ................
                                                  इन बाल मजदूरो का समय से पहले कड़ी मेहनत करना अनेक परेशानीयों को पैदा करता है .ये देश की युवा धन का दुरुपयोग होने के कारण देश पर सीधा असर पड़ता है .इससे गरीबी बढती है ,सामाजिक आर्थिक असमानता बढती है ..................यह एक सामाजिक बुराई है जो खत्म हो यह आवश्यक है क्यों की देश क भविष्य ये
बालक अगर सुखी नहीं तो हम कैसे चैन से सो सकते है ............................

3 टिप्‍पणियां:

विचारों का दर्पण ने कहा…

bahut badhiya ..........bache desh ke bhavishy hote hai ......aur desh ke bhavisy ke ye hall .....dukh hota hai ye dekh kar

vikas ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
vikas ने कहा…

pandit jawahar lal nehru ji ne kaha tha ki aaj ka bacha kal ka bhavi pradhanmantri ho sakta hai.
hum akasar apne aasa paas in bccho ko dekhte hain,jab koi vridh aadmi ko riksha chalte hue dekhte hain to bahut dukh hota hai.lekin shivaay lambi saas lene ke kuchh nahi kar paate hain.
VIKAS PANDEY
http://www.vicharokadarpan.blogspot.com/